सूचना भवन, सरायकेला-खरसावाँ प्रेस विज्ञप्ति दिनांक: 10 अक्टूबर, 2026.
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जिला अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, मानसिक रोगों की समय पर पहचान एवं उपचार पर दिया गया जोर…
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सामाजिक संकोच एवं भेदभाव दूर करने की अपील, मरीजों और परिजनों को दी गई आवश्यक जानकारी…
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सरायकेला-खरसावाँ, 10 अक्टूबर। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर दिनांक 10 अक्टूबर 2026 को NCD सेल, सरायकेला-खरसावाँ के तत्वावधान में जिला अस्पताल, सरायकेला-खरसावाँ के प्रतीक्षालय में मानसिक स्वास्थ्य परिचर्चा एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पीटर माइकल बड़ा ने की। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), सरायकेला-खरसावाँ के प्रतिनिधियों सहित स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों, कर्मियों एवं अन्य संबंधित सदस्यों ने भाग लिया।
मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य के समान है महत्वपूर्ण…
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पीटर माइकल बड़ा ने कहा कि मानसिक रोग किसी व्यक्ति की कमजोरी या असफलता का प्रतीक नहीं, बल्कि एक स्वास्थ्य संबंधी समस्या है। इसकी समय पर पहचान, उचित परामर्श एवं उपचार से प्रभावी प्रबंधन संभव है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य के समान महत्व दिया जाना आवश्यक है।
उन्होंने मानसिक तनाव, चिंता, अवसाद, नशे की लत, नींद में बदलाव तथा व्यवहार में असामान्य परिवर्तन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल, सरायकेला-खरसावाँ में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया गया है। यहां मनोचिकित्सक एवं प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के माध्यम से मरीजों को आवश्यक परामर्श एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने लोगों से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को छिपाने अथवा सामाजिक संकोच के कारण उपचार में देरी नहीं करने तथा समय रहते स्वास्थ्य संस्थान से संपर्क करने की अपील की।
इस अवसर पर जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. शालिनी ने मानसिक रोगों की पहचान, प्रमुख लक्षणों एवं उपचार के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि व्यक्ति के व्यवहार, सोच, भावनाओं तथा दैनिक कार्यक्षमता में लगातार एवं असामान्य बदलाव मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या के संकेत हो सकते हैं।
उन्होंने लंबे समय तक उदासी या निराशा रहना, अत्यधिक चिंता एवं बेचैनी, नींद अथवा भूख में असामान्य परिवर्तन, किसी कार्य में रुचि समाप्त होना, लोगों से अलग-थलग रहना, अत्यधिक चिड़चिड़ापन, ध्यान एवं एकाग्रता में कमी, असामान्य भय, भ्रम अथवा ऐसी आवाजें सुनाई देना, जो अन्य लोगों को सुनाई नहीं देतीं, जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि मानसिक रोगों का उपचार रोग की प्रकृति एवं गंभीरता के अनुसार दवाओं, मनोवैज्ञानिक परामर्श, मनोचिकित्सकीय उपचार तथा परिवार के सहयोग के माध्यम से किया जाता है। उपचार के दौरान चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार नियमित रूप से दवा लेना एवं निर्धारित समय पर फॉलो-अप कराना महत्वपूर्ण है।
मानसिक रोगों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की अपील…
कार्यक्रम के दौरान मानसिक रोगों को लेकर समाज में व्याप्त भ्रम, अंधविश्वास एवं सामाजिक कलंक को दूर करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। उपस्थित मरीजों एवं उनके परिजनों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लक्षणों की पहचान होने पर समय पर मनोचिकित्सक एवं मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेने के लिए प्रेरित किया गया।
साथ ही, परिवार के सदस्यों से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण एवं सम्मानजनक व्यवहार करने तथा उन्हें सामाजिक रूप से अलग-थलग नहीं करने की अपील की गई।
कार्यक्रम में डॉ. अनिर्बान महतो, NCD क्लिनिक, डेंटल क्लिनिक से राजू पासवान, NCD सेल से अशोक यादव एवं राधिका कुमारी, अस्पताल प्रबंधक, सुशीला महतो, सहिया, बाल कल्याण समिति की टीम सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।


